RSS ने शताब्दी वर्ष में सांगठनिक बदलाव करते हुए मध्य प्रदेश के तीन प्रांतों को खत्म कर 9 नए संभाग बनाने का फैसला लिया है। जानें पूरे प्रदेश का नया स्ट्रक्चर और किसे मिलेगी कमान।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में संघ के 100 साल पूरे होने पर बड़े संकेत दिए। जानें 75 साल की आयु में रिटायरमेंट और राष्ट्र निर्माण पर उनके विचार।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में जारी प्रवास श्रृंखला के तहत सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शुक्रवार को मध्यभारत प्रांत के भोपाल विभाग केंद्र पर दो दिवसीय प्रवास पर पहुंचे।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। RSS को BJP से जोड़कर देखना बड़ी गलती है। संघ का उद्देश्य सज्जन नागरिकों का निर्माण और समाज को विश्वगुरु बनने के लिए तैयार करना है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संगठन का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, यह लोगों का समूह है। उन्होंने कहा कि भारत में सभी हिंदू हैं और हिंदू राष्ट्र होना संविधान के अनुरूप है।
पूर्व कांग्रेसी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राहुल गांधी को 'बदतमीजों का बादशाह' कहा। जानें RSS को राष्ट्रभक्त बताने और 'स्वर्ग केवल हिंदुओं को मिलेगा' जैसे उनके तीखे बयानों पर मची राजनीतिक हलचल।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक जबलपुर में 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक शुरू। मोहन भागवत, दत्तात्रेय होसबाले और 407 कार्यकर्ता शताब्दी समारोहों, 'पंच परिवर्तन' और आगामी रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं।
छतरपुर में फरहान निज़ामी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर RSS पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी की। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को किया गिरफ्तार।
सतना में बाबा मेहर शाह दरबार के भव्य उद्घाटन समारोह में आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने राष्ट्रभक्ति, स्व-बोध और भारतीयता पर प्रेरक विचार रखे। उन्होंने कहा कि ‘स्व’ का भाव ही हमें सच्चा राष्ट्रभक्त बनाएगा। विविधता में एकता, भाषा और संस्कृति के संरक्षण को उन्होंने भारत की असली शक्ति बताया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास उसके सरसंघचालकों की प्रेरणादायक यात्राओं से जुड़ा है। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से लेकर डॉ. मोहन भागवत तक—छह युगदृष्टाओं ने संगठन, सेवा और राष्ट्रभक्ति की ज्योति को सतत जलाए रखा। इस लेख में जानिए कैसे हर सरसंघचालक ने समय की चुनौतियों में संघ को नई दिशा दी, और हिंदू संस्कृति को राष्ट्र की आत्मा के रूप में स्थापित किया।






















